आवारा भाई की ओमेगा 40
निचले दर्जे का नाविक नायक अपने हमशक्ल भाई की वजह से अपने असली नियत साथी को पहचान नहीं पाता। अपनी किस्मत का निशान मिलने के बाद भी उसे बेरहमी से ठुकरा दिया जाता है, जिससे उसका आत्मविश्वास टूट जाता है। इसी बीच उसका बहिष्कृत सौतेला भाई उसके करीब आता है और उसे संभालता है। भावनाओं और उलझनों के बीच नायक को एहसास होता है कि उसकी सच्ची किस्मत और प्रेम किसी और के साथ जुड़ी हुई है।