बलि बनी, महारानी बन गई 04
नाजायज़ बेटी नायिका को उसकी माँ की तरह डायन समझकर श्रापित नायक के पास बलि के रूप में भेज दिया जाता है। लेकिन उसका स्पर्श नायक के गुस्से को शांत कर सकता है। महल की साज़िशों और खतरों के बीच नायिका उसकी कैद में रहते हुए धीरे-धीरे एक मजबूत महिला बनती है। अब वह किसी की कठपुतली नहीं, बल्कि अपनी किस्मत खुद चुनने और आज़ादी हासिल करने के लिए लड़ती है।
नाजायज़ बेटी नायिका को उसकी माँ की तरह डायन समझकर श्रापित नायक के पास बलि के रूप में भेज दिया जाता है। लेकिन उसका स्पर्श नायक के गुस्से को शांत कर सकता है। महल की साज़िशों और खतरों के बीच नायिका उसकी कैद में रहते हुए धीरे-धीरे एक मजबूत महिला बनती है। अब वह किसी की कठपुतली नहीं, बल्कि अपनी किस्मत खुद चुनने और आज़ादी हासिल करने के लिए लड़ती है।