विधवा हूँ , कमज़ोर नहीं 03

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समय की यात्रा कर आई नायिका अपनी सौतेली बहन की जगह विवाह करती है, लेकिन शादी के पहले ही दिन नायक की मौत हो जाती है। अमीर विधवा बनकर वह नए जीवन में ढलने लगती है और पूरे परिवार को अपने क़ाबू में ले लेती है। तभी परिवार द्वारा नियुक्त नायक—एक रहस्यमय और खतरनाक अंगरक्षक—उसकी ज़िंदगी में प्रवेश करता है। उसकी तीखी नज़रें और बढ़ती क़रीबी नायिका के दिल को हिला देती हैं। सुरक्षा के नाम पर शुरू हुआ रिश्ता धीरे-धीरे ख़तरे और आकर्षण में बदलने लगता है।