सिंड्रेला से अरबपति की पत्नी 38
नायिका एक उपन्यास की सहायक भूमिका में प्रवेश करती है, जहाँ उसका काम सिर्फ़ त्याग करना था। किस्मत बदलने के लिए वह बेवफ़ा मंगेतर को छोड़ देती है और अपने जीवन पर ध्यान देती है। समाज की हँसी, शिक्षा को लेकर अपमान और साज़िशों के बीच वह सच उजागर करती है और सबको चुप करा देती है। इसी दौरान एक ताक़तवर नायक उसकी ज़िंदगी में आता है, जो सिर्फ़ उसी के प्रति समर्पित होता है। प्रेम, प्रतिष्ठा और करियर—नायिका इस बार सब कुछ अपने दम पर हासिल करती है।